“कम स्कोर को असफलता मानना सबसे बड़ी गलती है, टेस्ट का
उद्देश्य बच्चे को तोड़ना नहीं, उसकी तैयारी को मजबूत करना है”
कोचिंग कल्चर में Mental Health Support को Optional नहीं,
Education System का जरूरी हिस्सा बनाना होगा : मोहित तोमर
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विशेष बातचीत
प्रतियोगी
परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर आज पढ़ाई के साथ-साथ अच्छे प्रदर्शन का
दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। कई बार एक टेस्ट में कम नंबर आने के बाद विद्यार्थी स्वयं
को असफल मानने लगता है। धीरे-धीरे यह निराशा, anxiety और emotional stress का रूप ले
सकती है।
ऐसे
माहौल में क्या कोचिंग संस्थानों की जिम्मेदारी केवल पढ़ाने और टेस्ट लेने तक सीमित
होनी चाहिए? क्या हर कोचिंग सेंटर में counselling और mental-health support की व्यवस्था
होनी चाहिए? इन्हीं सवालों पर Podcaster, Content Creator और Education Sales
Consultant मोहित तोमर से हुई विशेष बातचीत।
सवाल: एक विद्यार्थी टेस्ट में कम स्कोर करता है और उसके बाद खुद को असफल
समझने लगता है। समस्या आखिर कहां है?
मोहित
तोमर: समस्या केवल कम नंबर की नहीं है, बल्कि उस नंबर को देखने के नजरिए की है।
एक टेस्ट विद्यार्थी की पूरी क्षमता का फैसला नहीं करता। टेस्ट का असली उद्देश्य यह
पता लगाना है कि तैयारी में कमी कहां है—Concept में, Time Management में,
Question Selection में या Revision में।
हमें विद्यार्थियों को यह समझाना होगा कि कम स्कोर एक Report Card नहीं, बल्कि
Feedback Report है।
अगर बच्चा 500 में से 300 नंबर लाता है, तो हमारा पहला सवाल यह नहीं होना चाहिए कि
“इतने कम क्यों आए?” बल्कि यह होना चाहिए कि “अगली बार 350 तक कैसे पहुंच सकते हैं?”
सवाल: क्या Coaching Centres में Mental Health और Counselling को पर्याप्त
महत्व दिया जा रहा है?
मोहित
तोमर: कुछ संस्थान इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर अभी बहुत कुछ
किया जाना बाकी है।
कोचिंग का मॉडल लंबे समय से तीन चीजों पर केंद्रित रहा है—Classes, Tests और
Results। अब इसमें चौथा pillar जोड़ने की जरूरत है—Student Well-being।
एक विद्यार्थी दिन में कई घंटे पढ़ता है, लगातार टेस्ट देता है और अपनी तुलना दूसरे
विद्यार्थियों से करता है। ऐसे में emotional support की जरूरत होना स्वाभाविक है।
Counselling को केवल तब नहीं लाना चाहिए जब बच्चा बहुत परेशान हो चुका हो।
Preventive counselling यानी शुरुआत से ही विद्यार्थियों को stress management,
exam anxiety और failure को handle करने की skills सिखानी चाहिए।
“Rank से पहले बच्चे को संभालना जरूरी है”
सवाल: कोचिंग संस्थान practically क्या बदलाव कर सकते हैं?
मोहित
तोमर: मैं इसे चार स्तरों पर देखता हूं।
पहला—Regular Counselling: हर विद्यार्थी को जरूरत के अनुसार counsellor तक आसानी से
पहुंच मिलनी चाहिए।
दूसरा—Test Analysis: केवल marks और rank बताने के बजाय test के बाद individual
performance analysis होना चाहिए।
तीसरा—Parent Communication: अभिभावकों को केवल यह बताना कि बच्चे के कितने नंबर आए,
पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भी समझाना होगा कि बच्चे पर unnecessary pressure कैसे
कम किया जाए।
चौथा—Faculty Training: Teachers और mentors को भी यह समझना जरूरी है कि किसी विद्यार्थी
के व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार चुप रहना, classes से दूरी बनाना या
performance में तेज गिरावट जैसे संकेतों को कैसे पहचानें और कब professional help
की सलाह दें।
सवाल: Parents की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?
मोहित
तोमर: बहुत महत्वपूर्ण।
कई बार बच्चा Coaching Centre से कम और घर की expectations से ज्यादा दबाव महसूस करता
है। “शर्मा जी के बेटे के इतने नंबर आए हैं”, “तुम्हारा selection होगा या नहीं?” जैसे
सवाल बच्चे के मन पर बहुत असर डाल सकते हैं।
Parents को comparison की जगह conversation शुरू करनी चाहिए।
बच्चे से पूछिए—“तुम्हें किस चीज में परेशानी आ रही है?”
सिर्फ यह मत पूछिए—“आज कितने नंबर आए?”
सवाल: क्या हर कम स्कोर को Mental Health समस्या मान लेना भी सही है?
मोहित
तोमर: नहीं। हर कम स्कोर depression नहीं होता और हर तनाव को medical condition मानना
भी सही नहीं है।
लेकिन लगातार उदासी, पढ़ाई या रोजमर्रा की गतिविधियों से दूरी, नींद या खाने में बड़ा
बदलाव, hopelessness या self-harm जैसे संकेतों को बिल्कुल ignore नहीं करना चाहिए।
ऐसे मामलों में परिवार और संस्थान को qualified mental-health professional से मदद
लेने में देर नहीं करनी चाहिए।
Education system को भी यह distinction समझना होगा—हर समस्या का solution
motivational speech नहीं होता। कई स्थितियों में professional support जरूरी होता
है।
एक टेस्ट, एक Rank और एक विद्यार्थी की पूरी पहचान नहीं
सवाल: विद्यार्थियों के लिए आपका सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या है?
मोहित
तोमर: मैं विद्यार्थियों से सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि एक टेस्ट में कम नंबर आपकी
क्षमता का प्रमाण नहीं है।
Competitive exams एक लंबी journey हैं। इसमें कभी score बढ़ेगा, कभी कम होगा। महत्वपूर्ण
यह है कि हर टेस्ट के बाद आप अपने बारे में कुछ नया सीखें।
अपने marks को अपनी identity मत बनाइए।
Test आपको बताता है कि आपको कहां सुधार करना है; यह तय नहीं करता कि आप कितने योग्य
हैं।
और अगर कभी आपको लगे कि stress आपके लिए संभालना मुश्किल हो रहा है, तो चुप रहने के
बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति, counsellor या qualified mental-health professional से
बात करना कमजोरी नहीं, समझदारी है।
मोहित तोमर : Student Mental Health के लिए 5 जरूरी बदलाव
01
| Marks से ज्यादा Analysis
कम नंबर आने पर blame नहीं, performance analysis होना चाहिए।
02 | Counselling को नियमित बनाना होगा
Counselling केवल crisis के समय नहीं, पूरे academic journey का हिस्सा होनी चाहिए।
03 | Parents को भी Educate करना होगा
Student counselling के साथ parent counselling भी जरूरी है।
04 | Teachers को Early Signs पहचानने होंगे
Faculty को academic performance के साथ student behaviour पर भी ध्यान देना चाहिए।
05 | Success की Definition बदलनी होगी
केवल rank और selection को सफलता मानने के बजाय learning, consistency और personal
improvement को भी महत्व देना होगा।
मोहित तोमर का संदेश
“बच्चे से उसका स्कोर
पूछने से पहले उसका हाल पूछिए। एक बेहतर education system वही है जहां विद्यार्थी सिर्फ
परीक्षा के लिए नहीं, जिंदगी की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो।”
मोहित तोमर
Podcaster | Content Creator | Education Sales Consultant
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& Revenue Generation | Lead Conversion & Customer Retention

